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स्त्री रहस्य ( The Feminine Mystery )

 पुरुष को स्त्री कभी समझ में नहीं आती और शायद इसीलिए पुरुष हमेशा यही समझता है कि स्त्री बेबूझ (not understandable) है ! पुरुष उस स्त्री से जन्म लेता है , रिश्ते निभाता है और निश्चित ही वे साथ-साथ जीते है ! लेकिन फिर भी  वो उसे पूरा समझ नहीं पाता और ऐसा क्या है जो स्त्री जाति के मामले में छूट रहा है ? भला वो समझ में क्यों नहीं आती ? इसी को The feminine mystery ( स्त्री रहस्य ) कहते है ! इसे निषेध ( prohibited या पाबन्दी ) की शक्ति भी कहा गया है !

अगर एक स्त्री किसी पुरुष के  प्यार में भी पड़ जाये तो भी पहल या आक्रमण नहीं करती , वो प्रेम में प्रतीक्षा करती है ! पहल का मौका पुरुष को  ही देती है ! हम किसी स्त्री से ऐसा न कह सकेंगे कि तूने मुझे प्यार में उलझा दिया और मै कहता हूँ स्त्रियाँ ही उलझाती है ! लेकिन आप स्त्री पर दोष नहीं डाल सकते क्योंकि वे कभी पहल नहीं करती , और वही उनका रहस्य है खींचना...और वो भी बिना किसी क्रिया के ! सिर्फ और सिर्फ होने मात्रा से ही आकर्षित कर लेना ! वो अगर आपके प्रेम में  गिर भी जाये तो भी उसकी ओर से इशारा नहीं होगा कि वो आपके प्यार में है ! बस उसकी मौजूदगी आपको खींचती है ! और पुरुष ही कहता है कि मैं तेरे प्यार में पड़ गया हूँ !

स्त्री पहल कभी नहीं करती क्योंकि पहल एक आक्रमण (aggression) है ! जब मैं किसी से कहता हूँ कि मै तुमसे प्यार करता हूँ  तो इसका मतलब कि मैं अपने से बाहर गया , मैंने खुद की पाबंदियां तोड़ी , मैंने कही जा के भावनात्मक आक्रमण किया या trace passing शुरू की ! और मैं दूसरे की सीमा में प्रवेश कर रहा हूँ ! इसी के उलट स्त्री किसी दूसरे की सीमा में पहले प्रवेश नहीं  करती ! और निश्चित ही उसका आकर्षण inactive है ! वो पुकारती है लेकिन उस आवाज़ में कोई गूँज नहीं होती , हाथ फैलाती है लेकिन उसकी बाहें दिखाई नहीं पड़ती , निमंत्रण दिया जाता लेकिन उस निमंत्रण की कोई रूप रेखा नहीं होती !


कर्म पुरुष को करना पड़ता है , पहल उसे करनी पड़ती है , और इसी वजह से अधिकतर प्रपोज पुरुष ही करता है ! 

 स्त्री का सारा रहस्य भी इसी में है कि वो नहीं भी कहती है और बुला लेती है ! नहीं बुलाती और निमंत्रण चला जाता है !


अब इसमें अगर और गहरे में उतरे तो बहुत सी बाते ख्याल में आएगी कि स्त्री सम्भोग (सेक्स) की दृस्टि से भी निषेधात्मक (prohibited) है ! इसीलिए आज तक दुनिया में कभी किसी स्त्री के ऊपर बलात्कार का जुर्म नहीं रखा गया ! किसी स्त्री ने लाखो वर्षो में किसी के ऊपर बलात्कार नहीं किया ! क्योंकि स्त्री के व्यक्तित्व में बलात्कार तो असंभव है ! पुरुष ही बलात्कार कर सकता है और करता भी है ! और 100 में 90 मौको पर पुरुष जो भी करता है वो बलात्कार ही है ! और उन मौको पर नहीं जो अदालत में पकड़े जाते है !

पति अपने पत्नी के साथ जो सम्बन्ध निर्मित करता है उनमे भी अधिकांश मौके पर बलात्कार ही करता  है ! क्योंकि पुरुष भी उसकी उस समय कोई इक्षा नहीं पूछता है , और दूसरी ओर पत्नी चुप भी है ! मैंने यहाँ बलात्कार का अर्थ किसी rape से नहीं लिया , इसे गलत न समझना ! बलात का अर्थ जबरदस्ती होता है और ऐसी क्रिया जो जबरदस्ती किसी एक पक्ष में हो, और दूसरे के पक्ष में हो या न हो इसका कुछ पता नहीं !

स्त्री चुप है और उसकी चुप्पी हाँ समझी जा सकती है ! और जो हमने समाज में व्यवस्था की है पति के प्रति, हमने पत्नी का कर्तव्य बांधा हुआ है ! पति उससे प्यार मांगे तो वो चुप हो कर उसे दे देती है ! लेकिन उस समय अगर पत्नी के मन में प्यार का भाव न हो तो क्रिया बेमाने ढंग से बलात्कार(जबरदस्ती ) ही मानी जाएगी !

लेकिन पुरुष जबरदस्ती कर सकता है क्योंकि उसका पूरा व्यक्तित्व आक्रामक (एग्रेसिव) है ! स्त्री का व्यक्तित्व ग्राहक है ! ये न केवल व्यक्तित्व बल्कि स्त्री की काया भी प्रकृति ने ऐसी गढ़ी है, कि उसका शरीर एक ग्राहक है ! पुरुष का शरीर हमलावर(dominant in sex period) है ! 

लेकिन सृजन होता है स्त्री से ! और जन्म हमेशा अँधेरे में ही होता है , बीज फूटता है मिटटी के अंदर ! और अगर बीज को रौशनी में ले आओ तो वो फूटना बंद कर देगा ! एक व्यक्ति अपनी माँ के गर्भ के निपट गहन अंधकार में जन्म लेता है ! और प्रकृति का सबसे बड़ा रहस्य है कि किसी भी जीव की प्रारंभिक उत्पत्ति हमेशा अंधकार या गुप्त तरीके से ही होती है ! और अपने आस-पास कोई भी ऐसी चीज गौर करे तो आप पाएंगे कि हर पहली चीज की शुरुवात हमेशा आपके सामने अनजाने में ही हुई !

और उसकी शुरुवात की गहराई को आप कभी नहीं जान सकते !  और गुप्त वही हो सकता है जो आक्रामक न हो ! इसीलिए पुरुष के व्यक्तित्व में सतह बहुत अधिक होती है गहराई कम  होती है और स्त्री के व्यक्तित्व में सतह कम होती और गहराई अधिक होती है ! और यही कारण है स्त्री जल्दी नहीं थकती और पुरुष स्त्री के तुलना में जल्दी थकता है क्योंकि आक्रमण हमेशा थका देता है ! इसिलए कुछ स्त्री वेश्याए भी कहलायी क्योंकि उनसे अनेको की तृप्ति हुई और फिर भी वे न थकी !इसलिए पुरुष कभी वेश्याएं नहीं हुआ , हाँ वो बलात्कारी जरूर बन गया !

पूरा का पूरा समाज पुरुषो के ही नियम और कायदे से पटा पड़ा है ! जिसमे स्त्री को एडजस्ट होना पड़ता है ! कहा गया है कि स्त्री कम  बीमार पड़ती है और जो थोड़ी अंदरूनी बीमारी है भी वो भी कही न कही अधिकांश  इन नियमो के कारण ही है ! hysteria जैसी बीमारी पुरुषों के समाज में स्त्री को एडजस्ट होने का परिणाम है ! अगर स्त्री का समाज हो और पुरुषों को उसमें एडजस्ट होना पड़े तो , पुरुषों में hysteria स्त्री के मुकाबले 5 गुना ज्यादा होगा क्योंकि उनका आक्रामक व्यक्तित्व उन्हें परेशान ही कर डालेगा ! ये तो स्त्री की प्रतिरोधक क्षमता है जो ये इस कदर पागल न हुई ! फिर भी स्त्री गुस्सैल , आपस में जलने वाली , किच -किच करना या चुगली करने वाली दिखाई पड़ती है ! ऐसा इसीलिए क्योंकि वे जो होने को पैदा हुई है समाज उन्हें वैसा होने नहीं देता ,उनसे कुछ और ही करवाने की कोशिश करता है ! जिससे उनकी सृजनात्मक शक्ति विध्वंश या उपद्रव की ओर चली जाती है !


अभी आगे है........ 

Written By

Abhishek Ojha

On

10-Aug-2020

 

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