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Your Precious Gems (तुम्हारी सर्वोत्तम कृति) !!

बैंग्लोर के डोमलूर इलाक़े में एक बूढ़ा मजदूर रहता था ! बूढ़े ने अपनी जवानी और बुढ़ापे का अधिकांश हिस्सा ग़रीबी में बिता दिया !

 कुछ सालों बाद बैंगलोर सरकार को भनक लगी कि ये बूढ़ा जिस जमीन पर अपनी झुग्गी बना कर रहता है , वहाँ पर सोने के एक बड़ी खाद्यान है !

भूगर्भ विश्लेषणों के बाद, उस ज़मीन की खुदाई में भारी मात्रा में सोने के अयस्क बरामद हुए ! और उन अयस्कों से करीब -करीब 185 किलो का सोना मिला ! सरकार ने बूढ़े को जमीन से हटाकर एक नए बंगले में शिफ्ट किया और कुछ किलो सोना उस बूढ़े को भी दिया !

बूढ़े के जीवन गति में बदलाव आया ! शुरू से ही उसे अच्छा पहनने और दिखने का शौक था ! उसने जो काम पहले किया कि उसने अपने लिए एक बड़ी कैडिलेक टूरिंग कार ख़रीदी ! उन दिनों टूरिंग कार के पीछे दो अतिरिक्त टायर भी लगे होते थे ! बुड्ढा रंगबाज़ था इसलिए उसने उसमे दिखाने के लिए 4 अतिरिक्त  टायर और जोड़ दिए ! उसने लॉन्ग कोट , एक हैट और अपनी वेशभूषा के समान को एक बड़े काले सिगार के साथ पूरा किया !

बूढ़ा मित्रवत (friendly nature) था ! और वह अपनी टूरिंग कार से डोमलूर की उन धूल भरी सड़को पर अपनी कार घुमाता रहता था क्योंकि वह सबको देखना और दिखना चाहता था ! और मज़े की बात ये है कि उसने कभी न अपनी कार से किसी को टक्कर मारी ,और न ही किसी के ऊपर अपनी कार चढ़ाई ! उसने किसी को कार से शारीरिक क्षति भी नहीं पहुंचाई ! कारण स्पष्ट था क्योंकि उस बड़ी खूबसूरत कार को ठीक सामने दो घोड़े उसे खींच रहे थे !

कुछ सालों बाद बूढ़े की मृत्यु हुई ! कार के मैकेनिक ने बताया कि कार के इंजन में कोई खराबी नहीं थी , लेकिन बूढ़े ने कभी सीखा ही नहीं कि , किस तरह से चाभी लगाकर उसका इंजन चालू किया जाएं ! कार के अंदर इंजन के रूप में 100 घोड़े तैयार थे ,और चलने को उत्सुक थे लेकिन वो बूढ़ा बाहर की और सिर्फ 2 घोड़ो का ही इस्तेमाल कर रहा था !

कहानी में हममें और बूढ़े में कोई खास अंतर नहीं है क्योंकि बहुत से लोग बाहर की ओर  दो घोड़े ढूंढने की गलती करते है , जबकि अगर आत्मबोध हो तो पता चले कि हमारे अंदर 100 से भी अधिक घोड़े है ! मनोविज्ञान कहता है कि हमारी उपलब्ध योग्यता और हमारे द्वारा प्रयोग की जाने वाली योग्यता की दर केवल 2 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक ही है !

मुझे लगता है कि सबसे बड़ी त्रासदी प्राकृतिक संसाधनों की बहुत अधिक बर्बादी नहीं है, हालांकि यह दुःख भरी बात है क्योंकि सबसे बड़ी त्रासदी मानव संसाधनों की बर्बादी है ! औसत व्यक्ति अपने संगीत ( मूल योग्यता ) को ही अपने अंदर दबाए हुए ही चिता के शैय्या या कब्र तक पहुँच जाता है !
और उसकी  मूल योग्यता या तो चिता के धुएं में ही उड़ जाती है या फिर कब्र के मिट्टी में ही गल जाती है ! इसलिए सभी की मधुरतम संगीत रचनाएँ वह है , जो कभी बजी ही नहीं !

बहुत लम्बे समय तक मैं सोचता था कि किसी इंसान के जीवन काल में सबसे दुःख भरी बात यही रही होगी कि जब वह मृत्यु की शैय्या पर हो ,तब उसे पता चले कि उसकी जमीन पर सोने की खाद्यान या तेल का कुआँ है ! व्यक्ति के अंदर उससे भी कई गुनी पड़ी हुई दौलत को न खोज पाना उससे अनंत गुना बद्द्तर है ! क्योंकि एक 1 पैसे और 20 डॉलर का मूल्य एक ही है , यदि वे समुद्र की तली में बैठे जंग खा रहे है ! मूल्य का अंतर तभी है जब उन्हें तली से बाहर निकल कर उनका उसी तरह प्रयोग करे जिस तरह उनका प्रयोग होना चाहिए !

हमारा मूल्य (value) वास्तविक हो जाता है जब हम अपने अंदर पहुंचना और वहाँ पर उपलब्ध संभावनाओं का उपयोग करना सीख जाते है ! लेकिन उससे पहले हमें समाज की भेड़चाल से भी बचना होगा ! नहीं तो जीवन उस चिराग़ की तरह होगा जिसके तले हमेशा अँधेरा रहता है !

Comments

  1. Well said through this type of story.

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  2. Search our unique way and Recognize""To ability of 100 Horses inside you.""
    Best line ##Mulya yogta chinta ke dhuve me ud jati hah##

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  3. Absolutely ryt brother, your story n way of bifurcation was ultimate. One think i notice in your story is that you creat a story n convert it into our life our inside me and that is very good keep going on. 👌

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