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A Deep Question ( एक गहरा सवाल )

गहरे से गहरा सवाल ये उठा हैं कि ईश्वर ही सबकुछ चला रहा है और हम कहते भी है कि मेरे  सबकुछ चाह लेने  से कुछ नहीं होता !
तो वैसे भी  ईश्वर के ही हाथ में हैं ! हम में से कोई भी ऐसा नहीं  जिसने अपने ज़िन्दगी में कभी कोई गलती नहीं की , या नुकसान नहीं उठाया, और तो और कुछ तो हत्या , चोरी ,या लूटपाट को भी अंजाम दे देते है ! कोई भी गलती , नुकसान या अपराध के परिणाम भुगत लेने के बाद मन में ख्याल जरूर आता है , सच में मैं  ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहता था ! ये आज जो भी मेरे साथ हुआ इसका उत्तरदायी कौन हैं ? मैं,मेरी किस्मत , परिस्थिति  या फिर वो ईश्वर ?.....
बात ये हैं कि अगर मैं कोई ग़लत काम नहीं करना चाहता तो भी तो ऐसी कौन सी दूसरी ऊर्जा हैं जो मुझसे ये बुरे काम जबरदस्ती करा देती हैं ? ईश्वर तो कुछ भी नहीं चाहता क्योंकि चाह लेना ईश्वर का काम नहीं , चाहत  एक जीव  की प्रकृति है , जिसके सामने कोई लक्ष्य खड़ा हो ! ईश्वर तो  स्वयं में ही एक लक्ष्य  होता है , ईश्वर क्यों सोचेगा की हमारा नुकसान हो !  तो आखिर फिर कौन है जो जबरदस्ती हम सभी को गलतियों या बुरे कामों  में धकेल रहा है


अनेक चिंतको ने इस पर विचार किया ! कुछ अन्य धर्मों के किताबों में ये बोला गया है कि ये एक शैतान है... वही सभी से बुरे काम कराता है ! मैं इस बात को सिरे से नकारता हूँ क्योंकि ये उत्तर न ही मनोवैज्ञानिक है और न ही सत्यता की कसौटी पर खरा उतरता है !  इस बात पर तो वो ही लोग राज़ी हो सकते हैं , जो किसी भी बात पर राज़ी हो जाते है ! मेरा कहना है ये कि अगर शैतान ही सारे बुरे काम करवा रहा है तो क्या उस पर परमात्मा का उस शैतान पर  कोई वश नहीं ! और यदि परमात्मा का कोई वश नहीं तो मैं फिर क्यों न शैतान की ही सत्ता मानूँ और उसी की पूजा करूँ।
असल में प्रकृति के तीन गुण होते है-
1- सत्व (Balanced,Goodness, constructive, harmonious)
2 -रजस (passion, active, positive)
3-तमस (darkness, destructive,inertia, negative )
इन तीन गुणों को बताने वाले भगवान श्री कृष्ण का ये उत्तर बहुत वैज्ञानिक है, वें कहते है प्रकृति त्रिगुणा है ! और मैं कहूं कि जब तीन गुणों वाली बात श्री कृष्ण ने कही थी तब बड़े वैज्ञानिक आधार रखती थी ! लेकिन श्री कृष्ण के बाद पिछले 5000 सालों जिसने भी ये बात कही, उन सभी को  इस बात के विज्ञान का जरा भी बोध न था वें सिर्फ दोहराते रहे...! लेकिन अभी पश्चिमी देशो में विज्ञान ने फिर कहा कि प्रकृति त्रिगुणा है !

Triguna concept
 
ये जो तमस अर्थ है एक अवरोध की शक्ति या रुकावट !  मान लो आप की कार में ब्रेक न हो फिर गति भी संभव नहीं है ! ऐसा नहीं लेकिन अगर चली भी तो उसके नियतांक वेग से उस कार का दुर्घटनाग्रस्त होना तो तय है ! उसमे वो ब्रेक भी चाहिए जो अवरोधक है ! जीवन में एकदम  से विस्फ़ोट ही जाये अगर प्रकृति में रोकने वाली ताकत ही न हो !

रजस गति की ताकत है ! अगर सही से समझे तो रजस और तमस एक दूसरे के विपरीत शक्तियाँ है ! क्योंकि तमस रोकता है और रजस गति देता है !

सत्व संतुलन की शक्ति है ! जैसे आप एक त्रिकोण बनाये और समझे कि ऊपर A कोण सत्व है और नीचे के बराबर 2 कोण B और C क्रमशः रजस और तमस हैं ! सत्व  रजस और तमस  के बीच एक संतुलन है ! आपकी बाइक में गति के लिए  एक्सेलरेटर है और गति अवरोध (रोकने) के लिए ब्रेक।। लेकिन अगर उसमे संतुलन के लिए ड्राइवर न हो तो क्या बाइक सही से चल पाना या स्टार्ट ही हो पाना संभव है ?  और बाइक चल भी गयी तो भी वो कही न कही भिड़ने वाली है !!
रजस सकारात्मकता ( प्रेम , दया , कृपा, गतिशीलता , खुशी आदि ) का कारक हैं ! तमस नकारत्मकता ( गुस्सा, ईर्ष्या , दुःख , रुकावट आदि ) का कारक हैं ! और सत्व आपकी अपनी बुद्धिमता या विवेक (intelligence) का कारक जो इन बाकी दो शक्तियों को संतुलित करने का काम करती है ! हमारे जीवन में बाहर और भीतर जो भी कुछ हो रहा वो इन तीन शक्तियों के आधार पर ही घटित हो रहा है ! आदमी हँसाया जाता, रुलाया जाता , सम्मानित होता ,अपमानित होता या जीवन और मरण को प्राप्त होता!  ये सब इन्ही तीन शक्तियों का ही खेल है ! ये परमात्मा के तीन रूप जीवन को सृजन देते रहते हैं !


हमें कौन गलत काम के लिए धक्के दे रहा है ? ये न सोचें ! ये सोचें की ये धक्का हमारे अंदर से कैसे निर्मित होता है ! गुस्सा, लालच , अहंकार।।।। अगर इनके प्रति हम अति से झुक जाये तो जो हम नहीं चाहते वो काम भी  हम्हें करना पड़ता हैं ! ये कहना सही नहीं होगा कि  गुस्से ने मुझे पकड़ लिया , कहना तो ये है की हमने ही खुद के विवेक से उस गुस्से को लपक लिया !

हम तो चाहते है कि हम जमीन पर फिसल के न गिरे, लेकिन ज़रा पैर फिसला कि हम जमीन गिर पड़े ! तो क्या शैतान या परमात्मा गिराता हैं आपको ! बिलकुल नहीं ! गुरुत्वाकर्षण (तमस ) अपना काम करता है ! क्योंकि प्रत्येक शक्ति नुकसान पहुंचाने वाली होती अगर हम उसके अनुकूल न चले तो !

इसी सन्दर्भ को मैं आगे कहता हूँ कि बीज़ बोते वक़्त किसे पता होता हैं कि वृक्ष बनेगा ! फिर एक समय बाद एक जबरदस्त वृक्ष खड़ा हो जाता है ! लेकिन इसके बीज़ तो हमहीं बोते हैं , बीज़ छोटा होता है और मिटटी में सुक्ष्म रूप में प्रवेश करता है ! मस्तिष्क में गुस्से , लालच का बीज़ बोते है ! फिर ब्रह्माण्ड में उपस्थित सारा तमस गुण आपके चेतना के माध्यम से आपके अंदर प्रवेश कर जाता है और उस गुस्से और लालच के सूक्ष्म बीज़ को पोषण देने का काम शुरू कर देता है ! मिट्टी या मस्तिष्क को फिर ज्यादा उसमें काम करने की जरूरत ही नहीं पड़ती ! एक बरगद के पौधे को के बड़े से गमले में लगाया गया ! इतनी मिटटी , इतने गमले का वजन और  कुछ मात्रा में बीज़ ! सब कुछ नापतोल कर उस गमले में लगाया गया ! कुछ साल बाद वो एक वृक्ष बना फिर उसने उस वृक्ष को गमले से बाहर निकाला और फिर से नापा !


तो जितना कोई 80 किलो की मिट्टी उसने उस गमले में लगाया उसमें सिर्फ डेढ़ किलो की ही मिटटी की ख़पत हुई बाकी का साढ़े 78 किलो मिटटी अभी भी गमले में शेष थी ! और वृक्ष को नापा और तौला तो वो कोई 1 टन के बराबर निकला ! और मेरा ख्याल है कि वो जो डेढ़ किलो मिटटी कम हुई हैं वो वृक्ष ने नहीं ली ! क्यूंकि हवा भी बहती है , तूफान भी आते है , और कुछ मिटटी पानी की वजह से बहार बह भी जाते है !  लेकिन वृक्ष बना कैसे ? क्योंकि उस वृक्ष को प्रकृति हवा दे रही है , बरसात दे रही है  और सूर्य की किरणे भी ! मतलब सारी ब्रह्माण्ड की आवश्यक ताकतें उस बीज़ पर लग गयी और उस पर लक्ष्य को बनाते हुए उसे एक वृक्ष का रूप दे दिया ! मिट्टी या मस्तिष्क का योगदान तो केवल नाम मात्र का है ! ये तो केवल उस बीज के रुकने का स्थान है !

आपने  मस्तिष्क में प्रेम का बीज़ बोया तो प्रकृति के रजस गुण आपके साथ जुड़ गयी या आपने गुस्से या नफरत का बीज़ बोया तो प्रकृति के तमस गुण आपका साथ देने लगी या आपने संतुलन या शांति की ओर बीज़ किया तो सत्व आपकी तरफ आकर्षित होना शुरू हो जायेगा ! ब्रह्माण्ड के तीनो शक्तियाँ असल में आपकी चेतना के अधीन है !
ये खुद नहीं आती ये तो आप जब इन्हे जाने या अनजाने में निर्देश देते है ये आपके अंदर प्रवेश कर जाती है ! और फिर उस छोटे से विचार के बीज़ को अवचेतन (SUBCONCIOUS ) का रूप बना देती है ! और फिर जब न चाहते हुए भी हमसे कोई गलती या अपराध हो जाये तो हम कहते है की अरे!!! ये क्या हो गया और मैं सच में ऐसा नहीं करना चाहता था और किसने ये गलत काम करवा दिया ? हो न हो ये पक्का ईश्वर ही चाहता होगा या कोई शैतान ने की करा दिया होगा ! इस बात पर मनोवैज्ञानिक इसे "The law of attraction" भी कहते है लेकिन फिर भी इसके पीछे का मूल कारण भी इन्हीं प्रकृति के तीन गुणों पर ही निर्भर है !

You Create everythings...
That happens to you !!
अभी शेष है........


Comments

  1. Really this type of thought hit the vein of mind

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  2. Thanks for your unique compliment.

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  3. I think you will become high class philosper in future. This blog defined zero to infinity. Speechless.. Superb.

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  4. Gajab bhai kya baate hai mza aa gya

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  5. What a Blog ?👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻 The best of All .
    When Every Person create in our mind For balance .
    These three unique things .
    1 - Satatv
    2- Rajas
    3- Tamas
    ## Then that person will Conquer everywhere##

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