इतिहास के पन्नों में एक युद्ध का उल्लेख मिलता है जिसे अंकारा की लड़ाई के नाम से जाना जाता है ! अंकारा की लड़ाई ऐसे दो अपंग ( शरीर के किसी भी अंग से विक्षिप्त ) बादशाहों के बीच में लड़ा गया, जिन्हे मैं किसी डकैत से कम नहीं समझता ! उज्बेकिस्तान और ओटोमन साम्राज्य के बीच ये लड़ाई अपने वर्चस्व को बढ़ाने और बचाने के लिए थी!
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| Bayezid ( A Ottoman King) |
20 जुलाई 1402 िश्वी में ये युद्ध एक डकैत तैमूर लंग और बादशाह बायज़ीद के बीच हुई ! 6 घंटे चले इस युद्ध में तैमूर जंग फतह कर ले गया ! उज्बेकिस्तानी रिवाज़ के अनुसार हारे हुए बंदी बनाए गए सैनिको की गर्दन धड़ से अलग की गई और उन नरमुंड के समूह से करीब 10-15 फिट की एक मीनार बना दी गयी ! ये मीनार उसके झूठे बादशाहत के हस्ताक्षर के तौर पर बनायीं गयी थी !
बायज़ीद का तख्ता पलट हुआ और उसे बंदी बना लिया गया !
हाथों में जंजीर से बांधकर बायज़ीद को तैमूर के सामने लाया गया ! तैमूर अपने सिंघासन पर बैठा और बायज़ीद को देख जोर से हसने लगा ! एक तो बायज़ीद हार गया था और दूसरा उसकी हंसी बायज़ीद को बुरी तरह कचोट रही थी ! उसने गुस्से से तैमूर से कहा कि- तुम इतनी छोटी सी विजय पर हंस रहे हो लेकिन याद रखना जो दुसरो की हार पर हँसता है उसे बाद में खुद की हार पर रोने का मौका भी नहीं मिलता !
Taimur Lung (A Ujbaikestani king )
इस बात को सुनकर तैमूर अपने सिंघासन को छोड़ दाएं पैर के सहारे बाये पैर को घसीटता हुआ बायज़ीद के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहता है, कि तू मुझे ग़लत समझ रहा है बायज़ीद ! मैं तेरी हार पर नहीं हंस रहा हूँ और न ही मुझे इस युद्ध को जीतने की इतनी ख़ुशी है ! मैं तो आश्चर्य से हँस रहा हूँ और आश्चर्य भी ये कि मैं ठहरा लंगड़ा और तुम काने ( बायज़ीद एक आँख से अँधा था ) ! मैं खुद को भी कई बार देख के हंस देता हूँ , लेकिन तुम्हे देखने के बाद मुझे एक सवाल सा मन में उठ गया कि क्या ईश्वर अंधो लँगड़ो या किसी अपंग को ही बादशाहत देता है ? इसी विचार से मुझे हसी आ रही है !
इस सन्दर्भ में मैं अगर कहूँ तो इसमें ईश्वर का कोई दोष नहीं ! असल में लँगड़ो ( मानसिक विकृति ) के अलावा कोई बादशाहत मांगता ही नहीं है ! एक स्वस्थ मन वाला इंसान कभी किसी पर अपना वर्चस्व दिखाने की कोशिश भी नहीं करता और न ही उसमें किसी भी तरह का रौब होता है ,वह स्वयं में ही परिपूर्ण है !
अगर वह किसी विभाग में अधिकारी पद पर भी है , तो भी वह अधिकारी भी भूमिका से परे अपने छोटे तबके वालों का नेतृत्व ( लीडरशिप ) करता है ! स्वस्थ मन वाला व्यक्ति कभी मालिक नहीं होना चाहेगा ! क्योंकि किसी का मालिक बनने में या किसी जीवित पर कब्ज़ा करने एक बीमार चित्त (मन ) और हिंसक की खबर मिलती है ! और जब हमें ये अहसास होता है कि हम किसी मालिक हो गए और उसकी गर्दन पर हमारा हाथ है और जब चाहे इसका कुछ भी कर दे ,इसमें जो मज़ा है वो एक बीमार मन या पागलपन की निशानी है !
अगर मैं वहाँ होता तो मैं तो मैं तैमूर से कहता कि इसमें ईश्वर कि कोई गलती नहीं है, तुम्हारा लंगड़ा होना या तुम्हारा काना होना ! तुम्हारे अंदर ये हीनता का भाव कि मैं लंगड़ा हूँ ,काना हूँ तो सारी दुनिया के सामने इस हीनता को मिटाने के लिए क्या तुम्हारे पास एक ही रास्ता था कि तुम लोगों को दबाओ , जीतो , दमन करो और बड़े बन जाओ ,ताकि दुनिया देख सके कि तुम कुछ हो और कोई इशारा करने की हिम्मत भी न कर सकें कि तुम लंगड़े (अस्वस्थ विचार ) हो ! और तो और जब दुनिया मान के कि तुम कुछ हो और तुम्हे भी विश्वास हो जाये की हाँ तुम कुछ हो,और तुम लँगड़े नहीं हो ! और तुम्हारे ऊपर एक पर्दा लग जाये जो तुम्हारी सारी बुराईया ढँक लें !
असल में हीन भावना से ग्रसित इंसान के अंतर्मन में एक खालीपन है उसे भरने के लिए वो बादशाहते या अधिकार खोजता है ,चाहें वह व्यक्ति हो या संपत्ति ! और फिर सामाज में एक प्रतिस्पर्धा (कॉम्पटीशन ) या दौड़ शुरू करता है ! मैं आगे कहना चाहता हूँ कि ऐसे इंसान की भीतर कुछ ऐसा सूनापन है या कुछ खाली सा है शायद उसमें कोई भराव नहीं है!
उसे एक डर है कि समाज में उसका रुतबा कैसे बना रहे या जो रुतबा पहले से क़ायम है वो कही खत्म ना हो जाएँ ! उसमे उसे हर समय एक आश्वासन (सिक्योरिटी) चाहिए ! और अगर वो हर समय न मिले तो उस अकेलेपन में एक घबराहट मालूम होती है और डर से बचने को वह अधिकारों की भयंकर लड़ाई लड़ेगा ! और उसकी कोशिश किसी अगले पर शासन की होती है और तानाशाही के रूप हिटलर से यही हीन भावना विश्व युद्ध तक करा देती है, और अनगिनत मानव जाति को मौत की आग में झोंक देती हैं !
(Be Readar)
Written By
Abhishek Ojha
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ReplyDeleteThanx Monster
DeleteYour thoughts like a philosopher. Good.
ReplyDeleteohh..thanq thanq..😊
DeleteThe way you input words is really nice keep it up dear. Nice story and give nice massage to around.
ReplyDeletethank you..bhaiya
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ReplyDelete😇😇😇 thank you
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ReplyDeletethank u.🙏
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Deletethanxx..
ReplyDeletethnq..
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